Blinking Post : तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र के चर्चित IAS अधिकारियों में शामिल तुकाराम हरिभाऊ मुंढे एक बार फिर अपने सख्त रवैये को लेकर चर्चा में हैं। नियमों के पालन, अचानक निरीक्षण और भ्रष्टाचार व मिलावट के खिलाफ सख्ती के कारण उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी (सिघंम) के तौर पर बनी है, जो कार्यवाही करते समय ज्यादा नियमों को ख्याल रखतें हैं। किसान परिवार से निकलकर UPSC में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल करने वाले तुकाराम मुंढे की कहानी संघर्ष, शिक्षा और प्रशासनिक दृढ़ इरादे की मिसाल मानी जाती है।
बीड के छोटे से गांव में हुआ पैदा हुए तुकाराम मुंढे
तुकाराम हरिभाऊ मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोन्ना गांव में हुआ। उनका परिवार खेती से जुड़ा है और जीवन की शुरूआत आर्थिक चुनौतियों के बीच गुजरी। परिवार का आर्थिकता का मुख्य साधन खेती ही था। बचपन में उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ खेतों में भी अपने परिवार का हाथ बटाया, उनकी शुरुआती पढ़ाई ताडसोन्ना की जिला परिषद स्कूल से हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके परिवार पर आर्थिक दबाव था खेती से होने वाली इंकम से उनका गुजारा नहीं होता था। यही परिस्थितियां आगे चलकर उनके व्यक्तित्व में अनुशासन और मेहनत को मजबूत करने वाली साबित हुईं।
औरंगाबाद से हासिल की उच्च शिक्षा
गांव की स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद तुकाराम मुंढे उच्च शिक्षा के लिए औरंगाबाद पहुंचे। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से इतिहास में ग्रैजुएशन की पढ़ाई की और इसके बाद राजनीति में मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी शिक्षा का सफर यहीं नहीं रुका। UPSC में चयन के बाद उन्होंने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशासनिक प्रशिक्षण लिया। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने बाद में सिंगापुर में क्राइसिस, इमरजेंसी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ा एक कार्यक्रम भी किया।
UPSC में प्राप्त किए ऑल इंडिया रैंक 20
तुकाराम मुंढे ने 2004 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के लिए हुआ और उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला। वे 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं। एक साधारण खेती करने वाले परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवाओं में जगह बनाना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।
दो दशक से ज्यादा का प्रशासनिक करियर
IAS बनने के बाद तुकाराम मुंढे ने महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने सहायक कलेक्टर और जिला कलेक्टर जैसे पदों के अलावा नगर प्रशासन और परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया। मुंढे की तैनाती महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों में रही है, जिनमें नांदेड़, वाशिम, जालना, सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे जैसे स्थान शामिल हैं।
पुणे महानगर परिवहन महामंडल लिमिटेड यानी PMPML में अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में भी उन्होंने काम किया। अलग-अलग पदों पर उनके फैसलों और काम करने के तरीके ने उन्हें महाराष्ट्र के सबसे चर्चित अधिकारियों में शामिल कर दिया।
20-21 साल में करीब 25 तबादले
तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे ज्यादा चर्चा उनके लगातार तबादलों को लेकर होती रही है। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, दो दशक से अधिक की सेवा में उनका करीब 25 बार तबादला हो चुका है। इसी वजह से उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में भी बनी, जिनकी सख्त कार्यशैली के कारण उनकी पोस्टिंग लंबे समय तक एक जगह नहीं रही। हालांकि, बार-बार तबादलों के बावजूद उनकी कार्यशैली में बड़ा बदलाव नहीं आया। वे कई जगहों पर नियमों के सख्त पालन, अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सुर्खियों में रहे हैं।
अब महाराष्ट्र FDA में सख्त कार्रवाई
25 मई 2026 को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पद संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया। उनकी कार्रवाई का असर खासतौर पर रेस्तरां, खाद्य कारोबार और मिलावट से जुड़े मामलों में देखने को मिला है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पदभार संभालने के बाद FDA ने महाराष्ट्र में 1,131 निरीक्षण किए और करीब 49.57 करोड़ रुपये मूल्य का खाद्य स्टॉक जब्त किया। इसमें लगभग 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध भी शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, संगठित गुटखा नेटवर्क के खिलाफ MCOCA के प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया और 56 रेस्तरां के लाइसेंस निलंबित किए गए।
मुंढे ने साफ किया की लोगों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ नही किया जाएगा
FDA आयुक्त बनने के बाद अपने शुरुआती आधिकारिक संदेश में मुंढे ने साफ संकेत दिया कि जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में नरमी नहीं होगी। उनका यही रुख उनके मौजूदा अभियान में भी दिखाई दे रहा है।
उनकी कार्यशैली का एक खास पहलू यह भी है कि आम नागरिक उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, BKC स्थित FDA मुख्यालय में उनके कार्यालय का दरवाजा कार्यदिवस में तय समय के दौरान आम लोगों के लिए खुला रहता है।
मुंबई के खाद्य कारोबार में बढ़ी हलचल
FDA की लगातार कार्रवाई के बाद मुंबई और महाराष्ट्र के खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में मुंढे की सख्त कार्यशैली की चर्चा बढ़ी है। हालिया रिपोर्टों में उनके नेतृत्व में रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया है।
उनका संदेश स्पष्ट है—खाद्य कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों को नियमों और स्वच्छता मानकों का पालन करना होगा और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसान परिवार से देश की प्रतिष्ठित सेवा तक
तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक IAS अधिकारी की कहानी नहीं है। बीड के एक गांव में किसान परिवार से निकलकर जिला परिषद स्कूल में पढ़ाई करना, आर्थिक परेशानियों के बीच शिक्षा जारी रखना, और फिर UPSC में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल करना उनके संघर्ष और मेहनत को दिखाता है। आज दो दशक से अधिक समय बाद भी उनकी पहचान उनकी सख्त प्रशासनिक शैली, नियमों के पालन और कार्रवाई करने के लिए बनी हुई है। लगातार तबादलों के बावजूद उन्होंने जिस तरह अपनी कार्यशैली को कायम रखा, उसी वजह से वे महाराष्ट्र के सबसे चर्चित IAS अधिकारियों में गिने जाते हैं।


