Blinkingpost: पड़ोसी देश नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में मूसलाधार बारिश, बादल फटने और ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आपदा में अब तक कम से कम 584 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,482 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें से नेपाल में 579 और तिब्बत क्षेत्र में 5 लोगों के शव बरामद हुए हैं। नेपाल में लापता 1,924 लोगों के अलावा 320 भारतीय नागरिकों से भी फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान जारी है।
ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यीय जत्थे का कोई सुराग नहीं
चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग क्षेत्र में आई इस जलप्रलय के दो दिन बीत जाने के बाद भी आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा स्थापित ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यीय जत्थे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर था।
ईशा फाउंडेशन की प्रतिनिधि मां गम्भीरी ने बताया कि लापता 77 यात्रियों के परिवारों के लिए यह बेहद कठिन और संवेदनशील समय है। इस दल में 19 अलग-अलग देशों के नागरिक शामिल हैं:
- अमेरिका: 22 यात्री
- कनाडा: 12 यात्री
- ऑस्ट्रेलिया: 11 यात्री
- ब्रिटेन (UK): 9 यात्री
- जर्मनी: 4 यात्री
- फ्रांस: 3 यात्री
- नेपाल: 3 यात्री
- अन्य देश: 13 यात्री
सद्गुरु स्वयं हालात का जायजा लेने और राहत प्रयासों में मदद के लिए आपदा के केंद्र ‘ग्यिरोंग’ पहुंचना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कारणों व प्रशासनिक अनुमतियों के चलते उन्हें इजाजत नहीं मिल सकी। फाउंडेशन ने भारत, चीन और नेपाल के विदेश मंत्रालयों व दूतावासों से त्वरित मदद की गुहार लगाई है।

नेपाल के इन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कई जिलों में बाढ़ और मलबे से अब तक 538 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं:
- चितवन: 221 शव
- नवलपरासी (पूर्व): 134 शव
- गोरखा: 46 शव
- नुवाकोट: 37 शव
- धाडिंग: 33 शव
- तनहुँ: 28 शव
- नवलपरासी (पश्चिम): 27 शव
- रसुवा: 12 शव
आपदा प्रबंधन अधिकारियों का मानना है कि कई टनल और दूरदराज के पहाड़ी गांवों से सड़क व संचार संपर्क पूरी तरह कट जाने के कारण हताहतों की वास्तविक संख्या और बढ़ सकती है।
7,451 जवानों का महा-रेस्क्यू ऑपरेशन; ताजा खतरों से बढ़ी चुनौती
आपदा के तीसरे दिन भी प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव कार्य जारी है। इस अभियान में 2,391 नेपाली सेना के जवानों सहित कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी दिन-रात जुटे हुए हैं।
हालाँकि, राहत कार्य के दौरान भी गंभीर प्राकृतिक बाधाएं लगातार सामने आ रही हैं:
- बैरियर लेक का फूटना: अस्थिर बैरियर झील के ओवरफ्लो होने से भोटे कोशी नदी में पानी का भारी सैलाब आ गया, जिससे रेस्क्यू टीमों को सुरक्षा कारणों से पीछे हटना पड़ा।
- 50,000 क्यूबिक मीटर का हिमस्खलन: ऊपरी पहाड़ों पर करीब 50 हजार घन मीटर बर्फ व मलबे का नया एवलांच गिरा है।
- नई झील बनने का खतरा: सैटेलाइट से प्राप्त ताजा तस्वीरों में ऊंचाई वाले इलाके में एक और विशालकाय कृत्रिम झील बनती दिखाई दे रही है, जिसमें पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं है। यदि यह झील फटती है, तो निचले इलाकों में विनाश का खतरा और बढ़ सकता है।


