Blinking post: अयोध्या के राम मंदिर की दान-पेटी से जुड़े विवाद की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। अदालत से पुलिस को रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव की 14 घंटे की कस्टडी रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुट गई हैं। बुधवार सुबह शुरू होने वाली पूछताछ में पुलिस का मुख्य फोकस दान-पेटी की चाबी, सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना होगा।
जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर सवाल किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें उन स्थानों पर भी ले जाया जा सकता है, जहां से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है। पुलिस यह जानने की कोशिश करेगी कि दान-पेटी की चाबी तक किसकी पहुंच थी और पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही।
इसी बीच, जांच की दिशा अब रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव की ओर भी बढ़ रही है। पुलिस को संदेह है कि चाबी और दान-पेटी से जुड़े कुछ अहम तथ्य इन दोनों के पास हो सकते हैं। ऐसे में पुलिस अदालत से उनकी कस्टडी रिमांड की मांग भी कर सकती है ताकि मामले की गहन जांच की जा सके।
सोशल मीडिया और फिल्मों में अक्सर पुलिस रिमांड को “थर्ड डिग्री” से जोड़कर दिखाया जाता है, लेकिन भारतीय कानून इसकी अनुमति नहीं देता। कस्टडी के दौरान किसी भी आरोपी के साथ शारीरिक प्रताड़ना करना गैर-कानूनी है। रिमांड से पहले और बाद में मेडिकल परीक्षण कराया जाता है और किसी भी प्रकार की चोट मिलने पर संबंधित अधिकारियों को जवाब देना पड़ सकता है। इसलिए जांच एजेंसियां आमतौर पर दस्तावेजी साक्ष्यों, तकनीकी जांच, आमने-सामने पूछताछ और मनोवैज्ञानिक रणनीतियों के जरिए सच्चाई तक पहुंचने का प्रयास करती हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि 14 घंटे की पूछताछ से पुलिस को कौन-कौन से नए तथ्य मिलते हैं और क्या इस बहुचर्चित मामले की गुत्थी सुलझाने में जांच को कोई निर्णायक सफलता मिलती है।



