मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए हुए नए समझौते में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास हेतु 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी राशि आखिर आएगी कहां से। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर वित्तीय योजना तैयार करेगा, लेकिन अमेरिकी करदाताओं के पैसे का उपयोग नहीं किया जाएगा।

इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहां वे यूएई, कुवैत और बहरीन के नेताओं से बातचीत करेंगे। इस यात्रा में फंडिंग मॉडल, निवेश की संरचना और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
खाड़ी देशों को आशंका है कि आर्थिक राहत मिलने के बाद ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय ताकत बढ़ सकती है। इसलिए वे किसी भी निवेश से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि धन का उपयोग विकास कार्यों में हो, न कि हथियारों या प्रॉक्सी नेटवर्क को मजबूत करने में।
समझौते में ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने और प्रतिबंधों में राहत देने की बात भी शामिल है। हालांकि इस पूरे वित्तीय पैकेज को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।
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