उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर सवाल, IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या ने फिर खड़े किए गंभीर सवाल

Blinking post (विचार): कुछ लोगों का मानना है कि अब जाति के आधार पर किसी का शोषण नहीं होता है ऐसे में आरक्षण,SC/ST एक्ट को समाप्त कर देना चाहिए। परंतु समाज में ऐसे अनेक उदाहरण मौजद है जिससे ये साफ होता है कि आज भी उच्यपदों पर बैठे कुछ सामन्तवादी सोच के लोग जाति के आधार पर शोषण करते है। हाल ही की एक घटना  IIT बॉम्बे से आई जिसने सभी को हैरान कर दिया है। IIT बॉम्बे के एक छात्र ने साहिल वाकोडे ने प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड कर ली। पहले तो IIT बॉम्बे ने उस पर परीक्षा में नकल का आरोप लगा कर उसका चरित्र हनन किया। जब शोसल मीडिया पर लोगों ने सीसीटीवी फोटेज की मांग की ओर आरोप को बेबुनियाद बताया तो IIT बॉम्बे में इस पर मांफी मांग ली। छात्र की आत्महत्या के मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को डीन पद से सस्पेंड कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, संस्थान के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने एक आधिकारिक ईमेल में कहा कि प्रो. डूला, जो अभी डीन (प्रशासनिक मामले) के तौर पर काम कर रहे थे, उन्हें इस पद से हटा दिया गया है।

अब सवाल है कि रोहित बेमुला सुसाइड केस के बाद जो विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव और छात्रों की शिकायतों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने “Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations, 2026” जारी किया उसका इतना विरोध हुआ कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। कुल मिलाकर, UGC Equity Regulations का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा में समान अवसर, भेदभाव की शिकायतों का समाधान और वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है, लेकिन हमे इस पर विचार करना होगा कि आखिर कौन लोग हैं जो इसका विरोध कर रहे हैं?

-सामाजिक चिंतक- रामकेश

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