Blinking post: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर ईंधन संकट का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्गों में जारी तनाव का असर तेल की कीमतों और सप्लाई पर पड़ रहा है। महंगे कच्चे तेल ने पाकिस्तान की पहले से कमजोर आर्थिक स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के पास करीब 28 दिनों का ईंधन भंडार बचा होने की बात सामने आई है। सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने घरेलू स्तर पर तेल की खपत कम करने और आयात का दबाव घटाने के लिए कई कदमों पर काम शुरू किया है।
आम लोगों पर इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दिया। सरकार ने महज तीन दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में तीन बार बदलाव किया। पेट्रोल के दाम में 3.40 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल की कीमत में 6.72 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
ईंधन संकट के बीच सरकार अब खपत नियंत्रित करने के लिए नए नियमों और प्रतिबंधों का ढांचा तैयार कर रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और समुद्री मार्गों से सप्लाई प्रभावित होती है, तो पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।


