आखिर मायावती शासन कॉल में बने 4  मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण विवाद क्यों?

Blinking post. लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मायातवी शासन काल में बने चार मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण को लेकर विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दअरसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मौजूदा शैक्षणिक सत्र में इन कॉलेजों में लागू करीब 91 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने दाखिले की काउंसलिंग पूरी तरह रोकने के बजाय सामान्य वैधानिक आरक्षण व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।

इन चार जिलों में बने हैं मेडिकल कॉलेज
विवाद अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा है। मामला इन कॉलेजों की राज्य कोटे की एमबीबीएस सीटों के बंटवारे को लेकर है। 2025 में सामने आई सीट मैट्रिक्स में प्रत्येक कॉलेज की 85 राज्य कोटे की सीटों में 62 सीटें एससी, पांच एसटी और 11 ओबीसी के लिए रखी गई थीं, जबकि केवल सात सीटें अनारक्षित थीं।
स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत मायावती ने बनवाए थे मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार की ओर से पहले दलील दी गई थी कि इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत हुई थी और पुराने शासनादेशों में एससी-एसटी के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान किया गया था। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था को राज्य के आरक्षण कानून के विपरीत बताया। अगस्त 2025 में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इन चार कॉलेजों में निर्धारित विशेष आरक्षण से जुड़े शासनादेशों को रद्द करते हुए सीटों को उत्तर प्रदेश के 2006 के आरक्षण कानून के अनुसार भरने का निर्देश दिया था।

अदालत ने करीब 91 प्रतिशत आरक्षण पर लागई रोक

अब 2026-27 के दाखिला सत्र में मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने करीब 91 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगाते हुए एससी के लिए 21%, एसटी के लिए 2% और ओबीसी के लिए 27% आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग की अनुमति दी है। अंतिम फैसला आने तक दाखिले अदालत के आदेश के अधीन रहेंगे।इस मामले को लेकर मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट जाने की अपील की है। फिलहाल मामला विचाराधीन है।

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