युद्ध में एंट्री कर रहे ह्यूमनॉइड रोबोट, बदल सकता है जंग का तरीका

भविष्य की लड़ाई में रोबोट होंगे आगे ? युद्ध क्षेत्र में शुरू हुआ नया प्रयोग

युद्ध में एंट्री कर रहे ह्यूमनॉइड रोबोट, बदल सकता है जंग का तरीका

Robot War : तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स तकनीक अब ऐसे मुकाम पर पहुंच रही है जहां इसका इस्तेमाल केवल उद्योग या घरेलू कामों तक सीमित नहीं रह गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यही तकनीक युद्ध के मैदान तक भी पहुंच सकती है। हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट को पहली बार युद्ध क्षेत्र से जुड़े प्रयोगों में शामिल किया गया है। अगर यह प्रयोग सफल साबित होता है तो भविष्य में जंग लड़ने का तरीका काफी हद तक बदल सकता है।

युद्ध क्षेत्र में भेजे गए दो ह्यूमनॉइड रोबोट

जानकारी के मुताबिक एक रोबोटिक्स स्टार्टअप ने परीक्षण के तौर पर दो विशेष ह्यूमनॉइड रोबोट यूक्रेन भेजे हैं। कंपनी के सह-संस्थापक और पूर्व सैनिक Mike LeBlanc के अनुसार इन रोबोटों का उद्देश्य सीधे लड़ाई करना नहीं बल्कि युद्ध क्षेत्र में निगरानी और जानकारी इकट्ठा करने जैसे कामों में मदद करना है। बताया जा रहा है कि Phantom Mk-I नाम के इन रोबोटों को इस साल की शुरुआत में फ्रंटलाइन के करीब भेजा गया था। फिलहाल इन्हें परीक्षण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और अलग-अलग परिस्थितियों में इनकी क्षमता को परखा जा रहा है।

सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश

रोबोट बनाने वाली कंपनी का कहना है कि भविष्य में इस तरह की मशीनें सैनिकों के लिए जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं। योजना यह है कि आने वाले समय में रोबोट ऐसे काम संभालें जो फिलहाल मानव सैनिकों को करने पड़ते हैं, खासकर खतरनाक मिशनों में। कुछ परीक्षणों के दौरान इन रोबोटों को हथियार पकड़ने और चलाने जैसी क्षमताओं के साथ भी जांचा गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रोटोटाइप मॉडल को पिस्टल और शॉटगन जैसे हथियारों के साथ प्रयोगात्मक तौर पर टेस्ट किया गया था, हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है।

युद्ध में तेजी से बढ़ रहा रोबोटिक्स का उपयोग

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यूक्रेन ने कई तरह के रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल शुरू किया है। सरकारी पहल United24 से जुड़े आंकड़ों के अनुसार हाल के महीनों में हजारों रोबोटिक मिशन पूरे किए गए हैं। इनमें से अधिकतर मिशन सीधे लड़ाई के लिए नहीं बल्कि सप्लाई और लॉजिस्टिक से जुड़े कार्यों के लिए होते हैं, जैसे सैनिकों तक हथियार, गोला-बारूद या जरूरी सामान पहुंचाना।

अभी लंबा रास्ता बाकी

विशेषज्ञों का मानना है कि ह्यूमनॉइड रोबोट को बड़े पैमाने पर युद्ध में इस्तेमाल होने में अभी समय लगेगा। इसके लिए तकनीकी विकास, सुरक्षा मानकों और सैन्य रणनीतियों में कई बदलाव करने होंगे। फिर भी इतना साफ है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ भविष्य की जंगें पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तकनीकी और स्वचालित हो सकती हैं।

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