Ashok Kharat Case: वायरल क्लिप्स को सर्च या शेयर करना पड़ सकता है भारी

Ashok Kharat Case: वायरल क्लिप्स को सर्च या शेयर करना पड़ सकता है भारी

इन दिनों देशभर में स्वयंभू बाबा अशोक खरात का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि उसने धर्म और ज्योतिष के नाम पर कई महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका शोषण किया। शिकायतें सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया है और मामले की जांच जारी है।इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुछ आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। कई लोग जिज्ञासा के चलते इन्हें ऑनलाइन खोज रहे हैं या दूसरों को भेज रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना गलत साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पीड़ित महिलाओं की पहचान उजागर होने का खतरा बढ़ जाता है और यह कानूनन भी समस्या खड़ी कर सकता है।

 

सरकार ने प्लेटफॉर्म्स को दिए सख्त निर्देश

महाराष्ट्र सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोशल मीडिया कंपनियों और कई वेबसाइट्स को आदेश दिया है कि अशोक खरात से जुड़े किसी भी प्रकार के अश्लील या निजी वीडियो को तुरंत हटाया जाए। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की सामग्री का प्रसार पीड़ितों की निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसी कारण लोगों को भी आगाह किया गया है कि ऐसे वीडियो को खोजने या आगे भेजने से बचें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

वायरल वीडियो के नाम पर बढ़ रहे ऑनलाइन ठगी के मामले

इंटरनेट पर जब भी कोई निजी या विवादित वीडियो वायरल होता है, तो साइबर अपराधियों के लिए यह मौका बन जाता है। साल 2025 के अंत में करीब 19 मिनट 34 सेकंड की एक निजी क्लिप वायरल होने के बाद ऐसा ही माहौल देखने को मिला था। साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ठग ऐसे मामलों में नकली लिंक तैयार करते हैं और लोगों को क्लिक करने के लिए उकसाते हैं। कई बार इन लिंक पर क्लिक करने से

  • मोबाइल या कंप्यूटर हैक हो सकता है
  • निजी डाटा चोरी हो सकता है
  • बैंक खाते तक से पैसे निकाले जा सकते हैं

इसी वजह से विशेषज्ञ बार-बार लोगों को चेतावनी देते हैं कि किसी भी संदिग्ध वीडियो या लिंक से दूरी बनाए रखें।

कानून क्या कहता है

भारत में किसी भी व्यक्ति के निजी या संवेदनशील वीडियो को बिना अनुमति शेयर करना अपराध की श्रेणी में आता है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66E के तहत किसी की निजता का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
इसके अलावा धारा 67 और 67A के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री का प्रसार करना भी दंडनीय अपराध माना गया है। दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को जेल की सजा के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ सकता है।

अशोक खरात से जुड़ा मामला यह याद दिलाता है कि इंटरनेट पर फैलने वाली निजी या संवेदनशील सामग्री को देखने, खोजने या आगे भेजने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे न केवल पीड़ितों की निजता को नुकसान पहुंचता है, बल्कि ऐसा करने वाला व्यक्ति भी कानूनी परेशानी में पड़ सकता है।
इसलिए ऑनलाइन दुनिया में सतर्क रहना और ऐसे कंटेंट से दूर रहना ही समझदारी है।

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