आज के समय में जिंदगी की रफ्तार और बढ़ती उम्र के साथ कई लोग की याददाश्त कमजोर होने की शिकायत करते हैं। ज्यादातर लोग इसे बढ़ती ऊमर के साथ बढ़ रहा बुढ़ापा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन जब कोई व्यक्ति बार-बार अपनी बातें भूलने लगे, अपने ही लोगों को पहचानने में परेशानी महसूस करने लगे या रोजमर्रा के छोटे काम भी मुश्किल लगने लगें, तो आपको यह समझ लेना चाहिए की यह डिमेंशिया का संकेत हो सकता है। डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि दिमाग से जुड़ी ऐसी स्थिति है जो इंसान की सोचने, समझने, याद रखने और निर्णय लेने की क्षमता को धीरे-धीरे प्रभावित करती है। इसका असर सिर्फ मरीज पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी पर पड़ता है।

डिमेंशिया क्या है आईए समझते हैं
डिमेंशिया एक ऐसी मानसिक स्थिति पैदा हो जाती है जिसमें हमारे दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे से कमजोर होने लगती हैं। इससे व्यक्ति की याददाश्त और व्यवहार में बदलाव आने लगता है, बिल्कुल शुरुआत में तो यह समस्या छोटी लगती है, लेकिन समय के साथ यह समस्या एक गंभीर रूप ले सकती है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि हर भूलने वाला व्यक्ति डिमेंशिया का मरीज होता है, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। सामान्य भूलने और डिमेंशिया में बड़ा अंतर होता है। डिमेंशिया में व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है।
डिमेंशिया के शुरुआती संकेत
- डिमेंशिया धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। जैसे:
- एक ही सवाल बार-बार पूछना
- सामान रखकर भूल जाना
- परिचित रास्ते भूल जाना
- बात करते समय सही शब्द न मिलना
- अचानक गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ जाना
- फैसले लेने में परेशानी
- लोगों से दूरी बनाना
- अगर ये लक्षण लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डिमेंशिया के मुख्य कारण
डिमेंशिया कई कारणों से हो सकता है। सबसे सामान्य कारण अल्जाइमर रोग माना जाता है। इसके अलावा स्ट्रोक, सिर में चोट, पार्किंसन जैसी बीमारियां और दिमाग में रक्त प्रवाह की समस्या भी इसका कारण बन सकती हैं। कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा ज्यादा हो जाता है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और तनाव जैसी चीजें भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
डिमेंशिया के चरण
1. शुरुआती चरण : इस अवस्था में मरीज छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है। परिवार को अक्सर लगता है कि यह सामान्य कमजोरी है। व्यक्ति अपना सामान भूल सकता है या बातचीत में उलझन महसूस कर सकता है।
2. मध्य चरण : इस समय मरीज को लोगों को पहचानने में परेशानी होने लगती है। व्यवहार बदलने लगता है और रोजमर्रा के कामों में सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
3. गंभीर चरण : यह डिमेंशिया का सबसे कठिन दौर होता है। मरीज को खाने, चलने और खुद की देखभाल करने में भी मदद की जरूरत पड़ती है। कई बार वह परिवार के सदस्यों को भी पहचान नहीं पाता।
क्या डिमेंशिया का इलाज संभव है?
फिलहाल डिमेंशिया का पूरी तरह स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही समय पर पहचान और उपचार से इसकी गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाइयां, मानसिक गतिविधियां, एक्सरसाइज और विशेष देखभाल की सलाह देते हैं। परिवार का सहयोग भी मरीज के लिए बहुत जरूरी होता है।
डिमेंशिया से बचाव कैसे करें?
- रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें
- दिमागी गतिविधियों में सक्रिय रहें
- अच्छी नींद लें
- तनाव कम रखें
- संतुलित भोजन खाएं
- धूम्रपान और शराब से दूरी रखें
- परिवार और दोस्तों के साथ जुड़े रहें
- परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
डिमेंशिया से जूझ रहे व्यक्ति को सबसे ज्यादा जरूरत प्यार, धैर्य और समझ की होती है। कई बार मरीज की बातें अजीब लग सकती हैं, लेकिन उन्हें डांटने के बजाय शांत तरीके से समझाना जरूरी होता है।
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