कंप्यूटर का इतिहास: दुनिया का पहला कंप्यूटर कब बना और भारत में कंप्यूटर कब आया?
आज के डिजिटल दौर में कंप्यूटर हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। चाहे ऑनलाइन पढ़ाई हो, टिकट बुकिंग हो, ई-मेल भेजना हो, ऑफिस का काम हो या फिर मनोरंजन के लिए गेम खेलना — लगभग हर काम में कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। एक समय था जब कंप्यूटर एक बड़े कमरे के बराबर हुआ करते थे, लेकिन आज वही कंप्यूटर छोटे-छोटे लैपटॉप और डेस्कटॉप के रूप में हमारे सामने हैं। तकनीक के विकास के साथ-साथ कंप्यूटर भी लगातार बदलते गए और आज यह इंसानों के लिए सबसे जरूरी मशीनों में से एक बन चुके हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया का पहला कंप्यूटर कब बना था और इसे किसने बनाया था?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल — भारत में कंप्यूटर की शुरुआत कब हुई?
आइए जानते हैं कंप्यूटर के इतिहास के बारे में विस्तार से।
कंप्यूटर का इतिहास लगभग 3000 साल पुराना है
कंप्यूटर का इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। लगभग 3000 साल पहले गणना करने के लिए एक उपकरण बनाया गया था जिसे अबेकस (Abacus) कहा जाता है।
अबेकस एक लकड़ी का फ्रेम होता था जिसमें तारों के ऊपर मोती जैसी संरचनाएं लगी होती थीं। इन मोतियों को आगे-पीछे करके गणना की जाती थी। उस समय यह गणितीय गणना करने का सबसे आसान तरीका था।
आज भी कई स्कूलों में बच्चों को गिनती और बेसिक गणित सिखाने के लिए अबेकस का उपयोग किया जाता है।
पहला डिजिटल कंप्यूटर किसने बनाया?
समय के साथ-साथ कई वैज्ञानिकों ने अलग-अलग प्रकार के कैलकुलेटिंग उपकरण बनाए।
1642 में फ्रांस के प्रसिद्ध गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) ने एक मशीन बनाई जिसे शुरुआती डिजिटल कैलकुलेटर माना जाता है।
इस मशीन को Pascaline कहा जाता था। इसमें नंबर वाले डायल होते थे और इन्हें घुमाकर जोड़ (Addition) किया जा सकता था। यह मशीन मुख्य रूप से गणना करने के लिए उपयोग की जाती थी।
मैकेनिकल कंप्यूटर का आविष्कार
1822 में चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने एक मशीन बनाई जिसे Difference Engine कहा जाता है। यह एक मैकेनिकल कैलकुलेटिंग डिवाइस थी जो जटिल गणनाएं करने में सक्षम थी।
इसके बाद उन्होंने Analytical Engine का विचार दिया। यह मशीन कई मायनों में आधुनिक कंप्यूटर की तरह थी क्योंकि इसमें:
डेटा स्टोर करने की क्षमता
गणितीय गणना
प्रोग्राम के अनुसार काम करने की क्षमता
जैसी खूबियां थीं।
इसी वजह से चार्ल्स बैबेज को “Father of Computer” कहा जाता है।
पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर
कंप्यूटर के विकास में अगला बड़ा कदम ABC (Atanasoff–Berry Computer) था।
इसे डॉ. जॉन एटनासॉफ और उनके छात्र क्लिफोर्ड बेरी ने बनाया था। यह दुनिया के शुरुआती इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों में से एक था।
दुनिया का पहला प्रोग्रामेबल कंप्यूटर
1945 में ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) बनाया गया। यह दुनिया का पहला प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था।
इस कंप्यूटर की कुछ खास बातें:
वजन लगभग 30 टन
इसे रखने के लिए 20×40 फीट का कमरा चाहिए था
इसमें 20,000 वैक्यूम ट्यूब्स लगी थीं
उस समय यह कंप्यूटर ऐसी गणनाएं 30 सेकंड में कर देता था, जिन्हें इंसान को करने में कई घंटे लग जाते थे।
कंप्यूटर की पांच पीढ़ियां (Generations of Computer)
कंप्यूटर के विकास को आमतौर पर 5 पीढ़ियों में बांटा जाता है।
1️⃣ पहली पीढ़ी (1940 – 1956)
इस दौर के कंप्यूटरों में Vacuum Tubes का उपयोग होता था।
विशेषताएं
आकार बहुत बड़ा
बिजली की खपत ज्यादा
गर्मी अधिक
उदाहरण:
ENIAC
EDVAC
IBM 701
2️⃣ दूसरी पीढ़ी (1956 – 1963)
इस पीढ़ी में Transistors का उपयोग शुरू हुआ।
फायदे
कंप्यूटर का आकार छोटा हुआ
गति बढ़ी
बिजली की खपत कम हुई
3️⃣ तीसरी पीढ़ी (1964 – 1971)
इस दौर में Integrated Circuits (IC) का उपयोग शुरू हुआ।
इससे:
कंप्यूटर और छोटे हुए
तेज़ हो गए
विश्वसनीयता बढ़ी
4️⃣ चौथी पीढ़ी (1972 – वर्तमान)
इस पीढ़ी में Microprocessor का आविष्कार हुआ।
यही वह दौर था जब कंप्यूटर बड़े कमरों से निकलकर लोगों के डेस्क और घरों तक पहुंच गए।
यहीं से पर्सनल कंप्यूटर (PC) का दौर शुरू हुआ।
5️⃣ पांचवीं पीढ़ी (आधुनिक युग)
आज का दौर Artificial Intelligence (AI) का है।
इस पीढ़ी के कंप्यूटर:
इंसानों की भाषा समझ सकते हैं
मशीन लर्निंग का उपयोग करते हैं
बेहद तेज़ और स्मार्ट हैं
भारत में कंप्यूटर कब आया?
भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत 1952 में मानी जाती है।
उस समय कोलकाता के Indian Statistical Institute में पहला कंप्यूटर लगाया गया था।
भारत का पहला डिजिटल कंप्यूटर
1956 में भारत में पहला डिजिटल कंप्यूटर HEC-2M लगाया गया।
इस कंप्यूटर को ब्रिटिश वैज्ञानिक Andrew Donald Booth ने बनाया था।
विशेषताएं:
लंबाई लगभग 10 फीट
चौड़ाई 7 फीट
ऊंचाई 6 फीट
कीमत लगभग 1 लाख रुपये
इसका उपयोग मुख्य रूप से वैज्ञानिक गणनाओं के लिए किया जाता था।
भारत में पहला स्वदेशी कंप्यूटर
1966 में भारत का पहला स्वनिर्मित कंप्यूटर ISIJU बनाया गया।
इसे बनाया था:
Indian Statistical Institute
Jadavpur University
इस कंप्यूटर में Vacuum Tubes की जगह Transistor का उपयोग किया गया था।
भारत का पहला सुपर कंप्यूटर
भारत का पहला सुपर कंप्यूटर PARAM 8000 था।
इसे C-DAC (Centre for Development of Advanced Computing) ने 1991 में विकसित किया।
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. विजय पी. भाटकर ने किया था। इसलिए उन्हें “Father of Indian Supercomputer” कहा जाता है।
PARAM 8000 बनने के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जो सुपर कंप्यूटर बनाने में सक्षम थे।
कंप्यूटर का इतिहास हजारों साल पुराना है। अबेकस से शुरू हुई यह यात्रा आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पहुंच चुकी है। आज कंप्यूटर केवल गणना करने की मशीन नहीं है, बल्कि शिक्षा, विज्ञान, व्यापार, मनोरंजन और संचार — हर क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। आने वाले समय में कंप्यूटर और भी ज्यादा शक्तिशाली और स्मार्ट बनने वाले हैं।
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